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युवाओं को मिला सफलता का मूल मंत्र: ‘एक साल की सही प्लानिंग और धैर्य से ही मिलेगी सरकारी नौकरी’

विशेष करियर गाइडेंस कार्यक्रम में UPSC, CGPSC, बैंकिंग और SSC के अभ्यर्थियों को दिए गए सफलता के अचूक टिप्स

दिले राम सेन।भिलाई/रायपुर:प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाने के लिए एक विशेष “करियर गाइडेंस एवं UPSC/PSC तैयारी मार्गदर्शन कार्यक्रम” का शानदार आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सही अध्ययन पद्धति, समय प्रबंधन, अनुशासन और सटीक रणनीति से अवगत कराना था।

​सफलता का मूल मंत्र: 1 वर्ष का मास्टर टाइमटेबल

​कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उमेन्द्र कौशिक ने UPSC और PSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की बारीकियों को साझा करते हुए कहा, “किसी भी बड़ी परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल अंधाधुंध पढ़ाई काफी नहीं है, बल्कि सही दिशा, निरंतरता (Consistency), धैर्य और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण हैं। एक साल की सही प्लानिंग आपकी सफलता का आधार बनती है।”

​उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए 12 महीनों का एक विस्तृत ‘स्टडी टाइमटेबल’ साझा किया, जो इस प्रकार है:

  • प्रथम 3 महीने (नींव मजबूत करने का चरण): शुरुआती तीन महीनों में विद्यार्थियों को NCERT पुस्तकों से अपना बेस मजबूत करना चाहिए। इतिहास, भूगोल और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों को समझें। साथ ही, रोज अखबार पढ़ने और नोट्स बनाने की आदत डालें।
  • 4 से 6 महीने (स्टैंडर्ड बुक्स और उत्तर लेखन): इस चरण में मानक (Standard) पुस्तकों का अध्ययन शुरू करें। करंट अफेयर्स, साप्ताहिक रिवीजन और मुख्य परीक्षा के लिए ‘उत्तर लेखन अभ्यास’ (Answer Writing) पर विशेष ध्यान दें।
  • 7 से 9 महीने (प्रैक्टिस फेज): यह समय मॉक टेस्ट देने का है। प्रीलिम्स के प्रश्नों का अभ्यास करें, समय सीमा में पेपर हल करें और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सुधारें।
  • 10 से 12 महीने (फाइनल टच): अंतिम महीनों में कुछ भी नया पढ़ने से बचें। केवल फुल-लेंथ मॉक टेस्ट दें, पुराने प्रश्नपत्रों को हल करें और पढ़े हुए का लगातार रिवीजन करें।
  • दैनिक दिनचर्या का नियम: उमेन्द्र कौशिक ने बताया कि विद्यार्थियों को प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे नियमित पढ़ाई करनी चाहिए। इसमें 1 घंटा करंट अफेयर्स और उत्तर लेखन के लिए अनिवार्य रूप से सुरक्षित होना चाहिए।

    ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा भी बदल सकते हैं अपनी तकदीर
    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भूपेंद्र शंकर सेन ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के दौर में सही मार्गदर्शन की भूमिका सबसे बड़ी है। उन्होंने कहा, “ग्रामीण या सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी भी यदि सही रणनीति और कड़ी मेहनत करें, तो वे निश्चित रूप से UPSC और PSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता का परचम लहरा सकते हैं।” उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने और खुद पर भरोसा रखने की सलाह दी।
    समाज के विकास के लिए मार्गदर्शन जरूरी: परमानंद जी
    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परमानंद जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि शिक्षा और सही मार्गदर्शन से ही समाज व राष्ट्र का विकास संभव है। उन्होंने इस आयोजन को युवाओं के भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए।
  • सफलता के 4 स्वर्णिम सूत्र:
  • Consistency (निरंतरता): पढ़ाई में एक भी दिन का गैप न होने दें।
  • सीमित सोशल मीडिया: भटकाव से बचें और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहें।
  • गलतियों से सीखें: मॉक टेस्ट में होने वाली कमियों से घबराएं नहीं, उन्हें सुधारें।
  • रिवीजन: बिना रिवीजन के की गई पढ़ाई अधूरी मानी जाती है।

कार्यक्रम का समापन उपस्थित सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की शुभकामनाओं के साथ हुआ। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों और वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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