दिले राम सेन।रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए राजपत्र में व्यायाम शिक्षकों की कथित उपेक्षा और विसंगतियों को लेकर ‘छत्तीसगढ़ शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ’ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष रितेश सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात कर तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपे। इस दौरान भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2025 की त्रुटियों को दूर करने और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत शारीरिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई गईं।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष रीतेश सिंह और महासचिव मृत्युंजय शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि स्कूल शिक्षा सचिव ने सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना है और इस दिशा में सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया है।
संघ द्वारा उठाए गए 3 मुख्य मुद्दे और मांगें:
1. राजपत्र की विसंगतियां दूर हों, सीधी भर्ती प्रक्रिया की जाए बहाल
संघ ने राजपत्र क्रमांक 81 (दिनांक 13.02.2026) में की गई गंभीर त्रुटियों पर कड़ी आपत्ति जताई है:
- भर्ती प्रक्रिया विलोपित: नए संशोधन में व्यायाम शिक्षकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह विलोपित कर दिया गया है, जिससे यह पद भविष्य में ‘शून्य’ होने की कगार पर पहुंच जाएगा। संघ की मांग है कि कुल पदों में 80% सीधी भर्ती तथा 20% विभागीय पदोन्नति का स्पष्ट प्रावधान किया जाए।
- न्यूनतम अर्हता: सहायक शिक्षक से पदोन्नति एवं सहायक जिला क्रीड़ा अधिकारी के पद पर प्रमोशन के लिए बी.पी.एड. (B.P.Ed.) डिग्री को अनिवार्य किया जाए।
- नए पदों का सृजन: विकासखंड क्रीड़ा अधिकारी के नए पद सृजित हों और सहायक संचालक क्रीड़ा के पदों का राजपत्र में स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
2. टी-संवर्ग (Tribal) के शिक्षकों को क्रीड़ा परिसरों में मिले पदोन्नति का लाभ
वर्ष 2015 में आदिम जाति विकास विभाग के स्कूलों का विलय स्कूल शिक्षा विभाग में किए जाने के बाद से ‘टी-संवर्ग’ के व्यायाम शिक्षक पदोन्नति के अवसरों से वंचित हैं।
- प्रदेश के 22 क्रीड़ा परिसरों में कोच के रिक्त पड़े 22 पदों पर इन योग्य व्यायाम शिक्षकों को तत्काल पदोन्नत कर पदस्थ किया जाए।
- राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व करने वाले योग्य शिक्षकों को रिक्त सहायक कोच के पदों पर प्रतिनियुक्ति (Deputation) दी जाए, ताकि राज्य की खेल प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
3. स्कूली पाठ्यक्रम में ‘शारीरिक शिक्षा’ को अनिवार्य विषय बनाने की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “नई शिक्षा नीति 2020” के मूल उद्देश्यों का हवाला देते हुए संघ ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में ‘शारीरिक शिक्षा’ को एक स्वतंत्र और अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए।
- दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों और CBSE व केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर राज्य के पाठ्यक्रम में भी इसे स्थान मिलना चाहिए।
- कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं: राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद (SCERT) द्वारा इसका पाठ्यक्रम पहले ही तैयार किया जा चुका है, जो केवल अनुमोदन के लिए लंबित है। चूंकि सरकारी स्कूलों में पहले से ही स्नातकोत्तर, एम.फिल और पीएचडी धारक उच्च योग्यता प्राप्त व्यायाम शिक्षक पदस्थ हैं, इसलिए शासन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आएगा।
“मैदान पर पसीना बहाने वालों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं”
संघ के अध्यक्ष रीतेश सिंह और महासचिव मृत्युंजय शर्मा ने दोकस्टूक शब्दों में कहा:
”प्रदेश के व्यायाम शिक्षक कोरोना काल से लेकर सामान्य दिनों तक बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए निरंतर मैदान पर पसीना बहा रहे हैं। इसके बावजूद राजपत्र में भर्ती नियमों को शून्य कर देना और पदोन्नति के अवसरों को रोकना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। हम शासन से इस विषय पर सकारात्मक और त्वरित कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं।”
अब देखना होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग संघ की इन कड़े रुख वाली मांगों पर कब तक और क्या कदम उठाता है।



