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राशन घोटाले पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी: मृत लोगों के नाम पर सालों तक उठता रहा राशन, मुख्य सचिव को शिकायत, सचिव से वसूली और FIR की मांग

दिले राम सेन।बलौदाबाजार/रायपुर: छत्तीसगढ़ के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मृत व्यक्तियों के नाम पर सालों तक अवैध रूप से राशन का आहरण करने और सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस पूरे मामले की परतें सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के बाद खुली हैं।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए महासमुंद जिले के सजग नागरिक और आरटीआई कार्यकर्ता लव कुमार पटेल ने सूबे के मुखिया मुख्य सचिव (छत्तीसगढ़ शासन) को सीधे तौर पर एक लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच, दोषी सचिव से वसूली और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला?

​शिकायतकर्ता लव कुमार पटेल ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के जनपद पंचायत कसडोल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नगरदा में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत साल 2020 से मई 2024 तक की अवधि में मृत राशनकार्ड धारकों और उनके परिजनों की जानकारी मांगी थी।

​ग्राम पंचायत के जनसूचना अधिकारी द्वारा 27 नवंबर 2024 को दी गई जानकारी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पंचायत के पास केवल 9 पन्नों के मृत्यु प्रमाण पत्र मौजूद थे। लेकिन नियमानुसार, इन मृतकों के नाम राशनकार्ड से विलोपित (हटाने) करने के लिए खाद्य विभाग या उच्च कार्यालयों को कोई पत्र या पावती नहीं भेजी गई थी।

​पंचायत सचिव की भूमिका पर उठे सवाल

​शिकायत पत्र में सीधे तौर पर ग्राम पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया गया है।

  • ​नियम क्या कहता है? नियमानुसार, ग्राम पंचायत सचिव की यह जिम्मेदारी होती है कि वह हर महीने होने वाली मौतों का रिकॉर्ड रखे और संबंधित राशनकार्ड क्रमांक का उल्लेख करते हुए शासकीय उचित मूल्य की दुकान के संचालक, जनपद CEO और जिला कलेक्टर (खाद्य शाखा) को रिपोर्ट भेजे ताकि मृतकों के नाम राशनकार्ड से काटे जा सकें।
  • ​लापरवाही या मिलीभगत? नगरदा पंचायत में ऐसा नहीं किया गया, जिसके चलते मृत व्यक्तियों के नाम पर भी उचित मूल्य की दुकान से लगातार राशन का अवैध आहरण होता रहा।

​तहसीलदार की अगुवाई में जांच टीम और FIR की मांग

​मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में आवेदक ने इस महाघोटाले की तथ्यात्मक जांच के लिए कसडोल तहसीलदार की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित करने की मांग की है। पत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  1. ​तथ्यात्मक मूल्यांकन: साल 2020 से 2024 के बीच मृत व्यक्तियों के नाम पर कुल कितने राशन का अवैध आहरण हुआ, उसका सटीक मूल्यांकन किया जाए।
  2. ​भू-राजस्व संहिता के तहत वसूली: दोषी ग्राम पंचायत सचिव से इस अवैध राशन की पूरी राशि वसूली जाए। नोटिस मिलने के बाद भी यदि सचिव भुगतान नहीं करता है, तो छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 147 (ख) के कड़े प्रावधानों के तहत कुर्की व अन्य वसूली की कार्रवाई की जाए।
  3. ​कड़ी कानूनी कार्रवाई: प्रमुख सचिव (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग) को निर्देशित कर दोषी लोक सेवक के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाए।

​प्रशासन में हड़कंप

​महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों की सरहद से जुड़े इस गंभीर मामले ने प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है। यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि यह खेल सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि प्रदेश स्तर पर इसकी निष्पक्ष जांच हो, तो कई और पंचायतों में भी ऐसे ‘मुरदा’ राशनकार्ड धारक करोड़ों का सरकारी अनाज डकारते हुए मिल सकते हैं।

​अब देखना यह होगा कि मुख्य सचिव कार्यालय इस पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और खाद्य विभाग इस ‘राशन लीकेज’ को रोकने के लिए क्या कड़े कदम उठाता है।

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