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छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में विवाद: आवेदक ने सूचना आयुक्त आलोक चंद्रवंशी पर लगाए गंभीर आरोप, बेंच बदलने की मांग

दिले राम सेन।रायपुर (नया रायपुर)।छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग एक बार फिर सुर्खियों में है। महासमुंद जिले के एक आरटीआई (RTI) आवेदक ने सूचना आयुक्त आलोक चंद्रवंशी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य सूचना आयुक्त से अपनी सभी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई किसी अन्य सूचना आयुक्त की बेंच में स्थानांतरित करने की लिखित गुहार लगाई है।

​आवेदक का आरोप है कि सूचना आयुक्त द्वारा मौखिक और लिखित तर्कों को दरकिनार कर “दूषित” (त्रुटिपूर्ण) आदेश पारित किए जा रहे हैं।

​क्या है पूरा मामला?

​महासमुंद जिले के ग्राम तिलकपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता लव कुमार पटेल ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त (विशिष्ट नाम: अमिताभ जैन) को एक शिकायती आवेदन सौंपा है। इस आवेदन में उन्होंने सूचना आयुक्त आलोक चंद्रवंशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मांग की है कि उनके मामलों की सुनवाई श्री चंद्रवंशी के अलावा किसी अन्य सूचना आयुक्त या स्वयं मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा की जाए।

​आवेदक के प्रमुख आरोप:

  • तर्कों को गायब करने का आरोप: आवेदक का कहना है कि गत 14 मई 2026 को हुई सुनवाई के बाद जब ऑनलाइन आदेश जारी हुआ, तो उसमें आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए गए लिखित और मौखिक तर्कों को शामिल ही नहीं किया गया।
  • ‘बोलता हुआ आदेश’ (Speaking Order) न देना: आवेदन के मुताबिक, सूचना का अधिकार अधिनियम की गरिमा के विपरीत, सुनवाई के दौरान ‘बोलता हुआ आदेश’ (स्पष्ट और तार्किक आदेश) पारित नहीं किया जा रहा है। बार-बार अनुरोध करने पर सिर्फ यह कह दिया जाता है कि “आपको आदेश की कॉपी मिल जाएगी।”
  • बेंच बदलने की पुरानी मांग: आवेदक ने बताया कि वे पूर्व में भी (28 मार्च 2024 और 22 जनवरी 2026 को) पंजीकृत डाक के माध्यम से आवेदन देकर सूचना आयुक्त आलोक चंद्रवंशी की बेंच से अपने मामलों को हटाने की मांग कर चुके हैं।

“सुनवाई के दौरान हमारे द्वारा रखे गए मजबूत कानूनी पक्षों को अंतिम आदेश का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा है। आयोग के रिकॉर्ड और दस्तावेजों को मंगवाकर इसकी समीक्षा की जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

– लव कुमार पटेल, आवेदक (महासमुंद)

​सूचना आयोग की साख पर सवाल?

​यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राज्य सूचना आयोग नागरिकों को पारदर्शिता के साथ न्याय देने वाली सर्वोच्च संस्था है। यदि आवेदकों को ही आदेशों की निष्पक्षता पर संदेह होने लगे, तो आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। आवेदक लव कुमार पटेल ने अपने आवेदन की प्रतिलिपि स्वयं सूचना आयुक्त आलोक चंद्रवंशी को भी सूचनार्थ भेजी है और मुख्य सूचना आयुक्त से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर अंतिम आदेश पर रोक लगाने की मांग की है।

​अब देखना यह होगा कि राज्य सूचना आयोग इस संवेदनशील शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या आवेदक की मांग पर बेंच में बदलाव किया जाता है या नहीं।

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