दिले राम सेन। चंद्रपुर/सकराली:सकराली परिक्षेत्र के तत्वावधान में मां नाथल दाई के पावन प्रांगण, चंद्रपुर में आयोजित ‘सर्व नाई सेन/श्रीवास समाज’ के “सामाजिक विचार मंथन” कार्यक्रम ने समाज सुधार की एक नई इबारत लिख दी है। 31 मार्च 2026 को आयोजित इस भव्य सम्मेलन में समाज के उत्थान के लिए न केवल ठोस रणनीति बनी, बल्कि फिजूलखर्ची रोकने हेतु 8 कड़े सूत्र (नियम) भी लागू किए गए।

विधायक राम कुमार यादव ने की 10 लाख की घोषणा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंद्रपुर विधायक श्री राम कुमार यादव ने समाज की एकजुटता की सराहना करते हुए सामाजिक भवन निर्माण हेतु 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सेन समाज की सेवा और समर्पण अद्वितीय है और यह भवन समाज के संगठित विकास का केंद्र बनेगा।
समाज सुधार के “8 सूत्र”: अब सादगी से होंगे कार्यक्रम
जिला अध्यक्ष ईंदल सिंह श्रीवास ने बताया कि वरिष्ठ बुद्धिजीवियों के मंथन के बाद सर्वसम्मति से निम्नलिखित 8 प्रस्ताव पारित किए गए हैं, जिन्हें जिले के सभी परिक्षेत्रों में लागू किया जाएगा:
- आर्थिक सहयोग की पहल: मृत्यु होने पर कफन के बजाय परिवार को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा (करीबी संबंधियों को छोड़कर)।
- मिठाई पर रोक: शोक की घड़ी (दशगात्र) में मिठाई परोसना प्रतिबंधित होगा।
- सात्विक भोजन: सामाजिक आयोजनों में केवल दाल, चावल, सब्जी, बड़ा और पुड़ी ही परोसे जाएंगे।
- नेंग की सीमा: शादी में ‘ढेंढ़हीन नेंग’ की अधिकतम राशि 3,000 रुपये निर्धारित की गई।
- जूता छुपाई: यह कोई अनिवार्य रस्म नहीं है; यदि स्वेच्छा से दें तो राशि 500 रुपये से अधिक न हो।
- व्यसन मुक्ति: शादी, छठी और जन्मदिन जैसे आयोजनों में मांस एवं मदिरा का सेवन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
- कलेवा (सेनानी) प्रथा बंद: कार्यक्रम के उपरांत वापस जाते समय दिए जाने वाले ‘कलेवा’ की प्रथा को समाप्त किया गया।
- सामाजिक सम्मान व बहिष्कार: यदि कोई बाहरी व्यक्ति सेन समाज के साथ भेदभाव करता है, तो समाज का कोई भी व्यक्ति उसके यहाँ हजामत, छठी या मृत्यु कार्यक्रम में नहीं जाएगा। नियम तोड़ने वाले स्वजातीय बंधु पर भी सामाजिक कार्रवाई होगी।
गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश संगठन मंत्री श्री दीनानाथ श्रीवास एवं सकराली परिक्षेत्र के पदाधिकारियों ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रांताध्यक्ष पुनित राम सेन, लोकनाथ सेन (प्रदेश अध्यक्ष कर्मचारी प्रकोष्ठ), ईंदल सिंह श्रीवास (सक्ती), संतोष कौशिक (बालोद), नरेंद्र सेन (महासमुंद), मोहन श्रीवास (कोरबा), बसंत श्रीवास (बलौदा बाजार), और रूपेश कौशिक (सारंगढ़) सहित प्रदेशभर के दिग्गज नेता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ से भीमेश्वरी श्रीवास और युवा प्रकोष्ठ से भुवनेश्वर श्रीवास सहित सैकड़ों की संख्या में स्वजातीय बंधुओं ने इन ऐतिहासिक निर्णयों का हाथ उठाकर समर्थन किया।
“यह मंथन केवल चर्चा नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को सुरक्षित और आडंबर मुक्त बनाने का संकल्प है।”
— दीनानाथ श्रीवास, प्रदेश संगठन मंत्री



