दिले राम सेन।रायपुर/बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के इतिहास में 15 जुलाई 2026 का दिन शिक्षकों के अभूतपूर्व आक्रोश और एकजुटता का गवाह बना। अपनी लंबित और न्यायसंगत 7 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक / समग्र शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों ने राजधानी रायपुर में एक ऐतिहासिक और विशाल ध्यानाकर्षण प्रदर्शन सह रैली की। प्रांतीय अध्यक्ष श्री रविन्द्र कुमार राठौर के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

आंदोलन के बाद फेडरेशन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय के नाम एक विस्तृत ज्ञापन तहसीलदार अभनपुर को सौंपकर अपनी मांगों के त्वरित निराकरण की मांग की।
“शौक से नहीं, सरकार की उदासीनता के कारण सड़क पर उतरे शिक्षक” — रविन्द्र कुमार राठौर
रैली को संबोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष श्री रविन्द्र कुमार राठौर ने गरजते हुए कहा:
”यह आंदोलन कोई शौक नहीं है, बल्कि यह शासन और प्रशासन की लगातार बनी हुई उदासीनता के कारण उपजा आक्रोश है। सरकार ने चुनाव के समय ‘मोदी की गारंटी’ के तहत हमसे जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने में देरी की जा रही है। हम सरकार से मांग करते हैं कि वे शिक्षकों की इन संवेदनशील और न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए अविलंब सकारात्मक निर्णय लें।”
ये हैं फेडरेशन की 7 सूत्रीय ज्वलंत मांगें, जिसने हिलाया शासन:
- वेतन विसंगति एवं क्रमोन्नति का लाभ: ‘मोदी की गारंटी’ (घोषणा पत्र) के वादे के मुताबिक सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति को तत्काल दूर किया जाए और क्रमोन्नति का लाभ दिया जाए।
- पदोन्नति में वरिष्ठता: माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का शत-प्रतिशत पालन करते हुए पदोन्नति में वरिष्ठता का पूर्ण ध्यान रखा जाए और TET की समय-सीमा 30 अगस्त 2028 तक सुनिश्चित की जाए।
- विभागीय परीक्षा का आयोजन: कार्यरत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग द्वारा अविलंब विभागीय TET परीक्षा आयोजित की जाए।
- प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना: शिक्षकों की कुल सेवा अवधि की गणना शिक्षाकर्मी या प्रथम नियुक्ति तिथि से करते हुए पुरानी सेवा के समस्त लाभ प्रदान किए जाएं।
- एकल शिक्षकीय शालाओं में नियुक्ति: शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए प्रदेश के सभी एकल शिक्षकीय स्कूलों में तुरंत अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था हो।
- VSK ऐप की तकनीकी समस्या से राहत: विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप की तकनीकी व नेटवर्क कमियों को ठीक किया जाए और जब तक यह दुरुस्त नहीं होता, तब तक किसी भी शिक्षक का वेतन न रोका जाए।
- युक्तिकरण एवं वित्तीय प्रभार: युक्तिकरण नीति के तहत मर्ज किए गए प्राथमिक शाला के प्रधान पाठकों को शाला प्रबंधन समिति (SMC) में कोषाध्यक्ष का प्रभार सौंपा जाए।
दिग्गज संगठनों का मिला महा-समर्थन
इस ऐतिहासिक आंदोलन को प्रदेश के कई प्रमुख संगठनों ने अपना खुला समर्थन दिया, जिससे यह आंदोलन एक महा-आंदोलन में तब्दील हो गया। समर्थन देने वालों में प्रमुख रूप से शामिल हुए:
- कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन से कमल वर्मा
- व्याख्याता शिक्षक संघ से विष्णु साहू, शंकर साहू और जाकेश साहू
- अन्य सहयोगी संगठन: सर्व शिक्षक संघ, नवीन शिक्षक संघ, हेडमास्टर वेलफेयर, जागरूक शिक्षक, संकुल समन्वयक संघ, विक्रम राय वाला और कमलेश बिसेन। इन सभी नेताओं ने मंच पर उपस्थित होकर शिक्षकों के हर अधिकार के लिए अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प लिया।
अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो होगा उग्र आंदोलन: प्रांतीय पदाधिकारी
फेडरेशन के प्रांतीय पदाधिकारियों—मनीष मिश्रा, राजू टंडन, देवेन्द्र हरमुख, शेषनाथ पाण्डेय, वसंत कौशिक, और कौशल अवस्थी ने संयुक्त रूप से शासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि आज का यह प्रदर्शन सिर्फ एक झांकी थी, शासन का ध्यानाकर्षण कराने का एक लोकतांत्रिक प्रयास था। यदि समय रहते विभाग और शासन द्वारा इन मांगों पर कोई ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता है, तो संगठन भविष्य में इससे भी अधिक उग्र और व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बलौदाबाजार जिले से उमड़ा शिक्षकों का हुजूम
इस आंदोलन को सफल बनाने में बलौदाबाजार जिले की टीम ने रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया। जिले से सैकड़ों की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं रायपुर पहुंचे थे। आंदोलन में बलौदाबाजार के प्रमुख पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें शामिल हैं:
- आलोक त्रिवेदी, कोमल साहू (प्रांतीय पदाधिकारी)
- मुरीत श्रीवास (जिला अध्यक्ष)
- पिंकी विकास चंद्राकर (जिला उपाध्यक्ष)
- तुलसी चरण जायसवाल (जिला सचिव)
- रितु मेश्राम (महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष)
- संत कुमार साहू, कोदूराम देवांगन, राजेंद्र कुमार पैकरा, गणेश राम साहू, लोचन बांधे (ब्लॉक अध्यक्ष)
इसके साथ ही जिले और ब्लॉक स्तर के तमाम पदाधिकारियों सहित सैकड़ों शिक्षक साथियों ने हुंकार भरी।
रायपुर की सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब इस बात का साफ संकेत है कि अब छत्तीसगढ़ का शिक्षक चुप बैठने वाला नहीं है। अब गेंद शासन के पाले में है; या तो सरकार बातचीत के जरिए ‘मोदी की गारंटी’ को पूरा करे, या फिर एक बड़े प्रशासनिक गतिरोध का सामना करने के लिए तैयार रहे।



