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देश के 250 ‘राष्ट्र निर्माताओं’ का रायपुर में महासम्मान: कोरबा के 7 नवाचारी शिक्षकों ने भी गाड़े सफलता के झंडे!

दिले राम सेन।रायपुर कोरबा,16जुलाई:छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का मधु पिल्ले चौक (शांति नगर) बुधवार को देश भर से आए शिक्षा जगत के दैदीप्यमान सितारों की चमक का गवाह बना। अवसर था राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत द्वारा आयोजित “स्व. श्री हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह–2026” का, जो अत्यंत गरिमामय, भव्य और प्रेरणादायी माहौल में संपन्न हुआ।

इस महासमारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चुने गए 250 उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके बेमिसाल नवाचारों, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अद्वितीय योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया।क

कोरबा के इन 7 ‘ज्ञानवीरों’ का बढ़ा मान

​इस राष्ट्रीय मंच पर ऊर्जाधानी कोरबा का परचम भी जमकर लहराया। जिले के 7 नवाचारी शिक्षकों को उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मानित होने वाले कोरबा के गौरव हैं:

  1. श्रीमती निर्मला शर्मा (पाली)
  2. श्री शांतिलाल कश्यप (पौड़ी उपरोड़ा)
  3. श्री संतोष कर्ष (पाली)
  4. श्रीमती श्रद्धा शर्मा (पाली)
  5. श्रीमती नंदिनी राजपूत (पाली)
  6. श्रीमती दीपिका देवांगन (करतला)
  7. श्री लोकनाथ सेन (करतला)

​ “शिक्षक कर्मचारी नहीं, राष्ट्र के चरित्र का निर्माता है” – डॉ. हिमांशु द्विवेदी

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और हरिभूमि समूह के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन से समारोह में जान फूंक दी। उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा:

“भारत का स्वर्णिम इतिहास गवाह है कि यहाँ गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है। लेकिन आज परिस्थितियां बदली हैं और कई जगह शिक्षकों को महज एक ‘कर्मचारी’ तक सीमित करने की कोशिश की जा रही है, जो चिंताजनक है। समाज को आत्ममंथन करना होगा कि जो आने वाली पीढ़ियों को गढ़ता है, उसे सर्वोच्च सम्मान मिले।”

​उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि शिक्षक के गौरव को पुनः स्थापित करने का एक राष्ट्रीय अभियान है।

​️ दिग्गजों ने बयां की शिक्षा की असली ताकत

  • डॉ. पूर्णानंद मिश्रा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत): उन्होंने अध्यक्षता करते हुए कहा कि भूतपूर्व प्रधानपाठक स्व. श्री हरिवंश मिश्र के आदर्शों, अनुशासन और समाज सेवा की भावना को जीवंत रखने के लिए इस सम्मान की शुरुआत की गई है, जो आगे भी जारी रहेगी।
  • मनोज वर्मा (संरक्षक): उन्होंने कहा कि सम्मानित शिक्षक ही समाज के असली रोल मॉडल हैं, जो नई पीढ़ी को ज्ञान और राष्ट्रप्रेम का संस्कार दे रहे हैं।
  • डॉ. प्रज्ञा सिंह (विशिष्ट अतिथि व राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका): उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक का काम सिर्फ सिलेबस खत्म करना नहीं, बल्कि विद्यार्थी के समूचे व्यक्तित्व का निर्माण करना है।

​欄 आभार और राष्ट्रगान के साथ भव्य समापन

​संस्था के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जितेन्द्र मिश्रा ने दिल छू लेने वाली बात कही कि “जब एक शिक्षक सम्मानित होता है, तो पूरी शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्र का भविष्य सम्मानित होता है।”

​कार्यक्रम का बेहद प्रभावी और सफल संचालन राष्ट्रीय महासचिव मोहन लहरी ने किया। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ इस ऐतिहासिक समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिजेंद्र कुर्रे, प्रेमचंद साव, रिंकल बग्गा, तरुण दास सहित राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा।

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