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कलेक्टर की चौखट पर खुला कसडोल स्वास्थ्य विभाग का ‘फर्जीवाड़ा’: 4 महीने पुराने CMHO के आदेश को ठेंगे पर रख, नियम विरुद्ध बटता रहा सरकारी वेतन!

दिले राम सेन।कसडोल,बलौदाबाजार:बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल स्वास्थ्य विभाग में नियमों को ताक पर रखकर मलाईदार जगहों पर जमे कर्मचारियों का खेल अब उजागर होने लगा है। इस पूरे मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय द्वारा जारी एक ताजा पत्र ने विभाग के भीतर चल रही मनमानी और आदेशों की अवहेलना की पोल खोलकर रख दी है।

​आदेशों को ठेंगा: संलग्नीकरण समाप्त, फिर भी मूल पदस्थापना से दूरी

विभागीय सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक पत्र (क्र./शिकायत/2026/3375, दिनांक 09/07/2026) के अनुसार, ग्राम सेमरिया निवासी आर टी आई एक्टिविस्ट दिले राम सेन ने कलेक्टर से इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत की थी।

​शिकायत के मुताबिक, कसडोल ब्लॉक के अंतर्गत कई स्वास्थ्य संस्थाओं में लंबे समय से ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (RHO) नियमों के विरुद्ध संलग्न (Attached) हैं। बड़ी बात यह है कि CMHO कार्यालय ने दिनांक 19.03.2026 (आदेश क्र/स्था.विज्ञ/2026/106) को ही इन कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थापना पर लौटने का आदेश जारी किया था। लेकिन साहब के रसूखदार मुलाजिमों ने इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया और अपनी मूल जगह पर जॉइनिंग ही नहीं दी।

​सबसे बड़ा सवाल: जब 19 मार्च 2026 को ही संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश जारी हो चुका था, तो किसके संरक्षण में ये कर्मचारी महीनों तक मलाईदार पदों पर जमे रहे? और सबसे गंभीर बात—नियम विरुद्ध अनुपस्थित रहने के बावजूद इन्हें वेतन का भुगतान कैसे होता रहा?

​अपनों की जांच करेंगे अपने: कैसे मिलेगा न्याय?

​इस पूरे मामले में सबसे हास्यास्पद और संदेहास्पद पहलू यह है कि ब्लॉक स्तर पर ही एक जांच समिति बनाई गई, जिसने मामले पर अपना ‘अभिमत’ (ओपिनियन) दे दिया और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) कसडोल ने उस पर आंख मूंदकर सहमति भी जता दी।

​अब जनता के बीच यह सवाल तेजी से गूंज रहा है:

  • ​जब उंगली खुद खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के दफ्तर और उनकी नाक के नीचे चल रहे खेल पर उठ रही है, तो उनके ही अधीन काम करने वाले मुलाजिम निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं?
  • ​क्या कोई भी कर्मचारी अपने ही विभाग के बड़े साहबों के खिलाफ रिपोर्ट तैयार करने की हिम्मत जुटा पाएगा?
  • ​क्या यह पूरी जांच समिति महज एक लीपापोती और औपचारिकता है, ताकि बड़े चेहरों को बचाया जा सके?

​CMHO ने फिर झाड़ा पल्ला, दिए ‘कड़ाई’ से पालन के निर्देश

​मामला कलेक्टर तक पहुंचने और लगातार फजीहत होने के बाद, अब CMHO कार्यालय ने दोबारा पत्र जारी कर BMO कसडोल को आदेश का ‘कड़ाई से पालन’ सुनिश्चित करने को कहा है। इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर बलौदाबाजार और शिकायतकर्ता दिले राम सेन को भी भेजी गई है।

लेकिन सवाल जस का तस बना हुआ है—जब पहले ही आदेश की धज्जियां उड़ाई जा चुकी हैं, तो इस नए पत्र के बाद क्या वाकई कसडोल स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में कोई सुधार आएगा? या फिर “अंधेर नगरी चौपट राजा” की तर्ज पर यह फाइल भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी?

​अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और कलेक्टर महोदय इस खुले भ्रष्टाचार और आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर कसडोल स्वास्थ्य विभाग का सच ऐसे ही फाइलों के नीचे दबा रहेगा।

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