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सहायक शिक्षकों ने भरी हुंकार: बलौदाबाजार में मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, चार सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी

दिले राम सेन।बलौदाबाजार–भाटापारा। छत्तीसगढ़ के सहायक शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले जिला इकाई बलौदाबाजार–भाटापारा ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।

​शिक्षकों की ‘पीड़ा’ और चार प्रमुख मांगें

​जिलाध्यक्ष मुरीत श्रीवास के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में फेडरेशन ने शिक्षकों की आर्थिक और मानसिक परेशानियों का हवाला देते हुए शासन के सामने चार मुख्य शर्तें रखी हैं:

  1. ​वेतन विसंगति का अंत (मोदी की गारंटी): फेडरेशन की मांग है कि चुनाव पूर्व किए गए वादों के अनुरूप सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर उन्हें उन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाए।
  2. ​प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना: एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवा की गणना उनकी प्रथम ज्वाइनिंग तिथि से की जाए, ताकि उन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन जैसे समस्त शासकीय लाभ मिल सकें।
  3. ​TET की अनिवार्यता समाप्त हो: पदोन्नति और अन्य प्रक्रियाओं में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की बाध्यता को खत्म करने की मांग की गई है।
  4. ​ऑनलाइन उपस्थिति (VSK ऐप) का विरोध: शिक्षकों ने निजी मोबाइल से VSK ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता पर आपत्ति जताई है और इस तकनीकी बाध्यता को खत्म करने की अपील की है।

​”शिक्षा की रीढ़ की अनदेखी बर्दाश्त नहीं”

​ज्ञापन सौंपने के दौरान फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कड़े स्वर में कहा कि सहायक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी इकाई हैं। इसके बावजूद, वर्षों से उनकी जायज मांगों को अनसुना किया जा रहा है।

​”हम सरकार से केवल अपना हक मांग रहे हैं। यदि हमारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।” – फेडरेशन प्रतिनिधिमंडल

​भारी संख्या में जुटे शिक्षक प्रतिनिधि

​इस दौरान जिला संयोजक संजय कुमार यादव, जिला सचिव तुलसीचरण जायसवाल समेत ब्लॉक अध्यक्षों, महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर एकता का परिचय दिया।

​अब सबकी नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह ‘मोदी की गारंटी’ और शिक्षकों के सम्मान के बीच सामंजस्य बिठाकर इस विवाद का समाधान निकाल पाती है या प्रदेश में एक बार फिर शैक्षणिक कार्यों में गतिरोध की स्थिति निर्मित होगी।

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