दिले राम सेन। बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षा फेडरेशन के आह्वान पर आज जिला मुख्यालय में सहायक शिक्षकों का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। ‘मोदी की गारंटी’ और चुनावी घोषणा पत्र के वादों को याद दिलाने के लिए जिले भर के सैकड़ों शिक्षकों ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया और रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।


“200 दिन बीते, वादा अब भी अधूरा”
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष मुरीत श्रीवास ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा ने चुनाव से पहले 100 दिनों के भीतर वेतन विसंगति दूर करने और क्रमोन्नत वेतनमान देने का वादा किया था। आज सरकार बने 200 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन सहायक शिक्षकों के हाथ अब भी खाली हैं। यह धरना सरकार को उसकी सोई हुई याददाश्त वापस दिलाने के लिए है।”
प्रमुख मांगें और विरोध के स्वर
सहायक शिक्षकों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर मुखर होकर आवाज बुलंद की। आंदोलन के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया गया:
- वेतन विसंगति का निराकरण: सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति को दूर करना।
- क्रमोन्नत वेतनमान: सभी शिक्षक संवर्गों को क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ देना।
- TET की बाध्यता: शिक्षकों पर से टेट (TET) की अनिवार्य बाध्यता को समाप्त करना।
- V.S.K. ऐप का विरोध: शिक्षकों ने ‘वी.एस.के. ऐप’ डाउनलोड करने के आदेश को निजता का उल्लंघन बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन था। यदि शासन ने मांगों पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस प्रदर्शन में संगठन की एकजुटता साफ दिखाई दी। कार्यक्रम में प्रांतीय पदाधिकारी आलोक त्रिवेदी, कोमल साहू सहित जिला अध्यक्ष मुरीत श्रीवास, जिला संयोजक संजय कुमार यादव, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती रीता मेश्राम,उपाध्यक्ष श्रीमती पिंकी विकास चंद्राकर, सचिव तुलसी चरण जायसवाल और कोषाध्यक्ष बुद्धदेव वर्मा ने नेतृत्व किया। साथ ही पांचों ब्लॉकों के अध्यक्षों—संत कुमार साहू (बलौदाबाजार), कोदूराम देवांगन (भाटापारा), लोचन बांधे (पलारी), गणेशाराम साहू (सिमगा), और राजेंद्र पैकरा (कसडोल)—सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए इस धरने ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।



