महेश्वर जायसवाल। बलौदाबाजार। वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और वानिकी कार्यों की जमीनी हकीकत परखने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं रायपुर वृत्त प्रभारी कौशलेन्द्र सिंह ने गुरुवार को बलौदाबाजार वनमंडल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य के जंगलों की सेहत आज किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर निर्भर है, इसलिए कार्य आयोजना (Working Plan) के हर मानक का पालन अनिवार्य है।

मैदानी बारीकियों का सूक्ष्म अवलोकन
निरीक्षण की शुरुआत देवपुर परिक्षेत्र से हुई, जहाँ PCCF ने SCI (Selection-cum-Improvement) कूप और बांस कूपों का जायजा लिया। उन्होंने केवल प्रगति ही नहीं देखी, बल्कि यह भी परखा कि क्या कार्य वैज्ञानिक पद्धति से हो रहे हैं। उन्होंने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- वानिकी कार्यों में तकनीकी शुद्धता सुनिश्चित की जाए।
- मैदानी स्तर पर वैज्ञानिक प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए।
सोनाखान में तकनीकी मार्गदर्शन
ऐतिहासिक सोनाखान परिक्षेत्र के भ्रमण के दौरान श्री सिंह ने RDF (Rehabilitation of Degraded Forests) क्षेत्रों का अवलोकन किया। यहाँ उन्होंने बांस विदोहन की तकनीकी बारीकियों पर विशेष कक्षा ली। उन्होंने समझाया कि बांस की कटाई केवल आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह वन संवर्धन की एक प्रक्रिया है। इसके साथ ही उन्होंने SCI और IWC वर्किंग सर्किल के दीर्घकालिक प्रभावों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिक्षु अधिकारियों को मिला अनुभव का लाभ
इस दौरे की खास बात यह रही कि PCCF ने न केवल निर्देश दिए, बल्कि वहां मौजूद प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षकों और वनक्षेत्रपालों का मार्गदर्शन भी किया। युवाओं को फील्ड की चुनौतियों और कार्य आयोजना के क्रियान्वयन के बीच के सामंजस्य को समझने का मौका मिला।
निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे:
- डीएफओ: गणवीर धम्मशील
- प्रशिक्षु एसीएफ: गुलशन साहू, अभिनव शर्मा
- कसडोल उपवनमंडल के प्रशिक्षु वनक्षेत्रपाल एवं अन्य विभागीय स्टाफ।



