दिले राम सेन। नई दिल्ली/बलौदा बाजार: दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान शनिवार, 4 अप्रैल को उस समय ‘इंकलाब’ के नारों से गूंज उठा, जब टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले देशभर के हजारों शिक्षकों ने ‘टेट (TET) अनिवार्यता’ के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। इस महा-आंदोलन में छत्तीसगढ़ की धमक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहाँ प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर के नेतृत्व में हजारों की संख्या में शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश दिया।

सरकार को चेतावनी: “अन्याय बर्दाश्त नहीं”
आंदोलन को संबोधित करते हुए TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्रा शर्मा ने दोटूक शब्दों में कहा कि टेट की अनिवार्यता उन लाखों शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो वर्षों से शिक्षा जगत को सींच रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस फैसले को तत्काल वापस नहीं लेती, तो यह आंदोलन दिल्ली की सड़कों से निकलकर देश के कोने-कोने में और उग्र रूप धारण करेगा।
सांसद जगदंबिका पाल ने दिया समाधान का भरोसा
इस ऐतिहासिक सभा में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने शिक्षकों के दर्द को समझा। उन्होंने मंच से आश्वस्त किया कि वे स्वयं इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करेंगे। पाल ने कहा, “शिक्षकों के साथ न्याय होना चाहिए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए मैं हर स्तर पर आवाज बुलंद करूँगा।”
छत्तीसगढ़ की प्रभावी भागीदारी
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने छत्तीसगढ़ी जज्बे का प्रदर्शन करते हुए कहा कि प्रदेश का हर एक शिक्षक अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। बलौदा बाजार सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों के जोश ने यह साबित कर दिया कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक निर्णायक क्रांति का आगाज़ है।
आंदोलन में शामिल प्रमुख पदाधिकारी:
इस महाजनसैलाब में छत्तीसगढ़ से प्रमुख रूप से मनीष मिश्रा (प्रदेश संयोजक), राजू टंडन (प्रदेश सचिव), बसंत कौशिक (कार्यकारी प्रांताध्यक्ष), और अशोक कुमार धुर्वे (प्रांतीय मीडिया प्रभारी) उपस्थित रहे।
साथ ही जिला एवं ब्लॉक स्तर के नेतृत्व में:
- बलौदा बाजार: मुरीत श्रीवास (जिला अध्यक्ष), संत कुमार साहू (ब्लॉक अध्यक्ष), राजेंद्र पैकरा (कसडोल), कोदूराम देवांगन (भाटापारा)।
- अन्य जिले: रामलाल साहू (खैरागढ़), पोखन साहू (बेमेतरा)।
- प्रतिनिधि: लखेश्वर साहू, पुनीत राम कोटरे, हेमलाल ध्रुव, ओमप्रकाश धृतलहरे, मनोज कुमार पैकरा एवं उमेंदराम साहू सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।
रामलीला मैदान की इस भारी भीड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक समाज अब अपने सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। दिल्ली की इस हुंकार का असर अब आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।



