
दिले राम सेन। कटगी/सेल | बुधवार रात आए सामान्य आंधी-तूफान ने कसडोल विद्युत विभाग के दावों और उनके द्वारा किए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। सेल से कटगी मार्ग पर मुख्य लाइन के लगभग 8 बिजली के खंभे धराशायी हो गए, जिससे दो दर्जन से अधिक गांवों की बिजली गुल हो गई।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी गुणवत्ता?
हैरानी की बात यह है कि खंभे सिर्फ गिरे नहीं, बल्कि गिरते ही तीन-तीन टुकड़ों में बिखर गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खंभों के इस तरह टूटने से साफ जाहिर होता है कि इनके निर्माण में मानक स्तर की सामग्री का उपयोग नहीं किया गया था।
ग्रामीणों का आक्रोश: “तूफान इतना भी भीषण नहीं था कि एक साथ इतने खंभे गिर जाएं। यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि विभाग का भ्रष्टाचार है। घटिया सीमेंट और कम सरिए के इस्तेमाल के कारण जनता की जान जोखिम में डाली जा रही है।”
विद्युत व्यवस्था ठप, जनजीवन प्रभावित
खंभों के गिरने से पूरे क्षेत्र में घंटों अंधेरा पसरा रहा। बिजली गुल होने से पेयजल आपूर्ति और अन्य आवश्यक कार्य पूरी तरह ठप हो गए। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण रात भर परेशान रहे। घटना के बाद से ही ग्रामीणों में मुख्य कार्यपालन अभियंता (EE) और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मामले के मुख्य बिंदु:
- स्थान: सेल से कटगी मुख्य मार्ग।
- नुकसान: 33kv लाइन के करीब 8 खंभे पूरी तरह क्षतिग्रस्त।
- प्रभाव: कई गांवों में घंटों तक विद्युत आपूर्ति बाधित।
- आरोप: निर्माण सामग्री में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार।
अधिकारियों का पक्ष
विद्युत विभाग के अधिकारियों ने मामले को ‘प्राकृतिक आपदा’ करार देते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। अधिकारियों का कहना है कि “तेज हवाओं के दबाव के कारण खंभे टूटे हैं। विभाग की टीम युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य में जुटी है और जल्द ही आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।”
जांच की उठ रही मांग
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इन खंभों की मजबूती की जांच नहीं हुई, तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।



