Homeword pressवनों की रक्षा का संकल्प: 'महुआ बीनने के लिए न जलाएं जंगल',...

वनों की रक्षा का संकल्प: ‘महुआ बीनने के लिए न जलाएं जंगल’, बलौदा बाजार में उठी प्रकृति संरक्षण की गूँज

दिले राम सेन

बलौदा बाजार-भाटापारा। वसंत की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ के वनों में महुआ के फूलों की मादक सुगंध तैरने लगी है। जहाँ एक ओर यह सुगंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खुशहाली का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में लगने वाली आग ने पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में भगवती मानव कल्याण संगठन के जिला अध्यक्ष नेमी चंद पटेल ने आम जनमानस और वनवासियों से वनों को सुरक्षित रखने के लिए एक भावपूर्ण अपील जारी की है।

महुआ: प्रकृति का उपहार और आजीविका का आधार

​नेमी चंद पटेल ने महुआ को ‘प्रकृति का अमृत’ बताते हुए कहा कि यह केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसकी सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और यह जैव विविधता (मधुमक्खियों और तितलियों) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए महुआ आजीविका का मुख्य साधन है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।

अग्नि का तांडव: अनजाने में किया जा रहा बड़ा विनाश

​अक्सर महुआ के फूलों को साफ-सुथरे तरीके से और आसानी से चुनने के लालच में कुछ लोग पेड़ के नीचे की सूखी पत्तियों में आग लगा देते हैं। श्री पटेल ने इस कृत्य को आत्मघाती बताते हुए इसके घातक परिणामों पर प्रकाश डाला:

  • वन्यजीवों का संकट: आग से छोटे जीवों और जमीन पर घोंसला बनाने वाले पक्षियों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
  • नवांकुरों का विनाश: धरती की कोख से फूट रहे नए पौधे जलकर राख हो जाते हैं, जिससे जंगल का विस्तार रुक जाता है।
  • मिट्टी की क्षति: आग से भूमि की ऊपरी परत की उर्वरता नष्ट हो जाती है।
  • प्रदूषण: धुएं के कारण वायु की गुणवत्ता गिरती है और वैश्विक ताप (Global Warming) में वृद्धि होती है।
RELATED ARTICLES
Jharkhand
light rain
30.8 ° C
30.8 °
30.8 °
63 %
7.3kmh
87 %
Tue
31 °
Wed
30 °
Thu
30 °
Fri
31 °
Sat
32 °

Most Popular