दिले राम सेन। रायपुर: प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग अब धरातल पर उतरती नजर आ रही है। कैशलेस चिकित्सा कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती उषा चंद्राकार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय पहुंचकर मुख्य स्वास्थ्य सचिव से मुलाकात की। इस दौरान कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान करने और वर्तमान व्यवस्था की खामियों को दूर करने पर विस्तार से सार्थक चर्चा हुई।

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम, शासन के बजट की होगी बचत
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य स्वास्थ्य सचिव के समक्ष मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि कैशलेस व्यवस्था लागू होने से न केवल कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि शासन को भी बड़ा वित्तीय लाभ होगा।
- डायरेक्ट लाभ: कर्मचारियों और उनके परिजनों को इलाज के लिए बड़ी रकम का इंतजाम नहीं करना होगा।
- बजट की बचत: वर्तमान में मेडिकल रीइम्ब्रर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) के रूप में शासन का एक बड़ा बजट खर्च होता है, जिसमें कैशलेस व्यवस्था के जरिए कटौती संभव है।
- भ्रष्टाचार पर रोक: प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताई कि वर्तमान रीइम्ब्रर्समेंट व्यवस्था में आए दिन भ्रष्टाचार और करोड़ों की राशि के बंदरबांट की खबरें आती रहती हैं। कैशलेस व्यवस्था लागू होने से बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
स्वास्थ्य सचिव ने दिया शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन
मुख्य स्वास्थ्य सचिव ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने स्वीकार किया कि कैशलेस सुविधा समय की मांग है और इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। सचिव ने आश्वस्त किया कि विभाग इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए मांगों को जल्द पूरा करने का प्रयास करेगा।
”कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से कर्मचारियों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा और शासन की राशि का दुरुपयोग भी रुकेगा। यह व्यवस्था प्रदेश के लाखों परिवारों के हित में है।”
— श्रीमती उषा चंद्राकार, प्रदेश अध्यक्ष
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ के संयोजक श्री राकेश सिंह, दुर्ग संभाग अध्यक्ष श्री पंकज राठौर एवं रायपुर संभाग अध्यक्ष श्री देवप्रसाद साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में शासन से इस जनहितैषी योजना को जल्द से जल्द लागू करने का आग्रह किया है।



