Homeword pressचैत्र प्रतिपदा — कालचक्र का शंखनाद और हिंदू गौरव का पुनरुत्थान

चैत्र प्रतिपदा — कालचक्र का शंखनाद और हिंदू गौरव का पुनरुत्थान

“अभिमान हो अपनी संस्कृति पर, गर्व हो अपनी जड़ों पर…”

दिले राम सेन। 19 मार्च, 2026 | भारतवर्ष आज केवल तिथि का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान का पर्व है। आज 19 मार्च, गुरुवार को जब संपूर्ण प्रकृति नवीन पल्लवों और पुष्पों से श्रृंगारित है, तब भारत अपने गौरवशाली ‘विक्रम संवत’ के नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है। यह वह कालखंड है जो हमें अपनी गौरवशाली विरासत और ऋषि-परंपरा की याद दिलाता है।

ब्रह्मा की सृष्टि और विक्रमादित्य का शौर्य

​हिंदू नववर्ष मात्र एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि श्रद्धा और शौर्य का संगम है:

  • सृष्टि का आदि पर्व: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन ब्रह्मा जी ने काल-गणना का आरंभ किया और शून्य से इस चराचर जगत की रचना की।
  • विक्रम का संकल्प: सम्राट विक्रमादित्य ने आज ही के दिन शकों को पराजित कर भारत की सीमाओं को सुरक्षित किया और एक लोक-कल्याणकारी संवत की स्थापना की। यह पर्व ‘स्वराज’ और ‘विजय’ का प्रतीक है।

गुरुवार का दिव्य योग: धर्म और ज्ञान की प्रधानता

​इस वर्ष नव संवत्सर का प्रारंभ गुरुवार को होना अत्यंत दुर्लभ और शुभ है। देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु का आशीर्वाद इस वर्ष को ‘ज्ञान, नैतिकता और धर्म’ की स्थापना का वर्ष बनाता है। यह समय अधर्म के नाश और सत्य के मार्ग पर चलने के संकल्प का है।

जीवन के ९ आधार: नव-शक्ति का जागरण

नव संवत्सर हमें नौ दिव्य तत्वों को जीवन में उतारने का संदेश देता है, जो हमें पूर्णता की ओर ले जाते हैं:

प्रकृति का उत्सव: ऋतुराज का आगमन

​जहाँ पाश्चात्य नववर्ष कड़कती ठंड और अंधकार में मनाया जाता है, वहीं भारतीय नववर्ष प्रकृति के साथ लयबद्ध है। वृक्षों पर नई कोपलें, खेतों में लहलहाती फसल और चैत्र की सुगंधित पवन उद्घोष करती है कि नया जीवन शुरू हो चुका है। यह ‘ऋतुराज वसंत’ के पूर्ण यौवन का समय है।

संकल्प: नए युग का सूत्रपात

​आज का दिन आत्म-मंथन का है। आइए, इस नव संवत्सर पर हम संकल्प लें कि:

  1. ​अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करेंगे।
  2. सकारात्मकता को अपना हथियार बनाएंगे।
  3. राष्ट्र और समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को सर्वोपरि रखेंगे।

“कलश स्थापना से लेकर गुड़ी फहराने तक, मंत्रोच्चार से लेकर दीप प्रज्ज्वलन तक—हिंदू नववर्ष हमें अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग दिखाता है।”

जयतु सनातनम्। जयतु भारतवर्षम्।

आप सभी को सपरिवार हिंदू नववर्ष एवं नव संवत्सर की अनंत मंगलकामनाएँ!

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