
दिले राम सेन।बलौदाबाजार। शासकीय आयुर्वेद औषधालय अर्जुनी (ब) कसडोल से जुड़ा एक आरटीआई मामला अब छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग की चौखट पर है। यह प्रकरण न केवल सूचना के अधिकार (RTI) के उल्लंघन का उदाहरण बन गया है, बल्कि यह भी सवाल उठा रहा है कि क्या नए अधिकारी अपने पूर्ववर्तियों की कानूनी गलतियों का बचाव कर सकते हैं?
धारा 6(3) की अनदेखी: ‘पोस्ट ऑफिस’ बनने के बजाय ‘वापस’ किया आवेदन
आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 6(3) बहुत स्पष्ट है—यदि आवेदन गलत कार्यालय में गया है, तो उसे 5 दिनों के भीतर सही विभाग को भेजना अधिकारी की जिम्मेदारी है। लेकिन अर्जुनी औषधालय में कानून की इस बुनियादी समझ को ताक पर रख दिया गया।
- गलती: आवेदन को अग्रेषित करने के बजाय “अधिकृत नहीं” कहकर वापस कर दिया गया।
- नियम: कानूनन अधिकारी को आवेदन स्वीकार कर उचित कार्यालय को भेजना था, न कि आवेदक को खाली हाथ लौटाना।
’औषधालय कार्यालय नहीं है’—कानून से बचने का नया पैंतरा?
विभाग का यह तर्क विशेषज्ञों के गले नहीं उतर रहा कि औषधालय ‘कार्यालय’ की श्रेणी में नहीं आता। विशेषज्ञों के अनुसार:
- जहाँ सरकारी कर्मचारी पदस्थ हैं, वह लोक प्राधिकरण का हिस्सा है।
- जहाँ शासकीय रिकॉर्ड रखे जाते हैं, वहां आरटीआई लागू होती है।
- सूचना पटल (Notice Board) न लगाना विभाग की प्रशासनिक लापरवाही है, न कि आरटीआई से बचने का आधार।
वर्तमान अधिकारी की ‘भविष्यदृष्टा’ भूमिका पर सवाल
प्रकरण क्रमांक C/2362/2023 में सबसे पेचीदा मोड़ यह है कि जिस समय आवेदन लगाया गया, उस समय पदस्थ अधिकारी अलग थे। अब वर्तमान अधिकारी आयोग को जवाब दे रहे हैं। सवाल यह है कि:
”जो अधिकारी उस समय वहां मौजूद ही नहीं था, वह उस कालखंड की प्रक्रियाओं और निर्णयों की पुष्टि किस आधार पर कर रहा है?”
मंशा पर सवाल या सूचना छुपाने की ढाल?
विभाग ने शिकायतकर्ता दिलेराम सेन पर ‘परेशान करने की मंशा’ का आरोप मढ़ा है। अक्सर देखा गया है कि जब विभाग के पास ठोस कानूनी बचाव नहीं होता, तो वे आवेदक के चरित्र या मंशा को ढाल बनाने की कोशिश करते हैं। जबकि आरटीआई कानून में ‘सूचना मांगने का कारण’ बताना अनिवार्य नहीं है।
आयोग की सुनवाई पर टिकी निगाहें
9 दिसंबर 2026 को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या विभाग अपनी सुविधानुसार आरटीआई नियमों की व्याख्या कर सकता है?
- क्या धारा 6(3) का उल्लंघन करने वाले तत्कालीन अधिकारी पर जुर्माना लगेगा?
- क्या औषधालय को आरटीआई के दायरे से बाहर रखने की कोशिश को आयोग फटकार लगाएगा?
यह मामला प्रदेश के अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी एक नजीर साबित होगा।



