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हजारों साल पुरानी मान्यता से जुड़ा “नऊ बारात” स्थल बन सकता है नाई समाज का प्रमुख तीर्थ — स्थानीय लोगों ने जताई संरक्षण की मांग

मालखरोदा (जिला सक्ति)। ग्राम पंचायत पोता के समीप स्थित “नऊ बारात (नाई बारात)” नामक स्थान आज भी रहस्यमय और आस्था का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय परंपरा और जनश्रुति के अनुसार, हजारों वर्ष पहले एक नाई परिवार की बारात इस स्थान से होकर जा रही थी। रात होने पर पूरी बारात ने यहीं विश्राम किया, किंतु रात में कोई अलौकिक घटना घटी और सुबह होते-होते पूरी बारात पत्थर में परिवर्तित हो गई। यही कारण है कि आज भी उस स्थान पर पत्थर के रूप में कई आकृतियाँ देखने को मिलती हैं, जिन्हें लोग श्रद्धा और भक्ति से पूजते हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि “नऊ बारात” स्थल पर मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं। आसपास के गांवों के लोग यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं और हर वर्ष विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यह स्थान नाई समाज के लिए आस्था का प्रतीक बन चुका है, लेकिन इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अनुरूप इसे अभी तक पहचान और संरक्षण नहीं मिल पाया है।

स्थानीय समाजजनों का कहना है कि यदि प्रशासन और समाज के लोग मिलकर इस स्थल पर ध्यान दें, तो यह नाई समाज का एक बड़ा तीर्थस्थल और मेला स्थल बन सकता है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

इसी स्थल के पास सड़क के दूसरी ओर समाज की ओर से एक सामाजिक भवन भी बनाया गया है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, उस भवन पर किसी अन्य व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है और उसे अपने घर की तरह उपयोग कर रहा है। समाज के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन को शीघ्र मुक्त कराकर नाई समाज के उपयोग हेतु पुनः उपलब्ध कराया जाए।

स्थानीय निवासी रामलाल नाई ने बताया, “यह स्थान हमारे पुरखों की आस्था से जुड़ा है। यहां हर वर्ष लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। अगर सरकार या समाज मिलकर इसे विकसित करे तो यह हमारे समाज की पहचान बन सकता है।”

ग्रामीणों की मांग:

  • “नऊ बारात” स्थल को धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया जाए।
  • स्थल पर शेड, पानी, बैठने की व्यवस्था और पूजा स्थल का सौंदर्यीकरण किया जाए।
  • कब्जा किए गए समाजिक भवन को मुक्त कराकर समाज को वापस दिलाया जाए।
  • वार्षिक मेला आयोजन की सरकारी स्वीकृति दी जाए।

यदि उचित पहल की जाए तो “नऊ बारात” न केवल नाई समाज का गौरव स्थल बनेगा, बल्कि सक्ति जिले का एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र भी बन सकता है।


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