42 डिग्री तापमान में शाला संचालन के फरमान से फूटा रोष; फेडरेशन ने कहा— ‘जरूरत पड़ी तो मोबाइल रख, मशाल उठाएंगे’


दिले राम सेन।बलौदा बाजार।छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग द्वारा बिना किसी ठोस तैयारी के अनिवार्य किए गए वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप ने लागू होते ही पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन तकनीकी विफलता और सर्वर डाउन होने के कारण प्रदेश के हजारों शिक्षक अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करा सके।
ग्रामीण और सुदूर वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क गायब होने, फेस रिकॉग्निशन फेल होने और लोकेशन मिसमैच जैसी गंभीर तकनीकी त्रुटियों के चलते शिक्षक घंटों मोबाइल थामे धूप में खड़े रहने को मजबूर दिखे। इस बदहाल व्यवस्था के बीच विभाग द्वारा उपस्थिति न होने पर जून माह का वेतन रोकने का फरमान जारी करने को शिक्षकों ने पूरी तरह से तानाशाही और अन्यायपूर्ण बताया है।
“जब विभाग का सर्वर खुद ‘आईसीयू’ में है, तो खामियाजा शिक्षक क्यों भुगतें?”
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला बलौदा बाजार के जिला अध्यक्ष मुरीत श्रीवास ने शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लेते हुए आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
”शिक्षा विभाग पहले अपनी खुद की बदहाल डिजिटल व्यवस्था को सुधारे। टीचरों के व्यक्तिगत मोबाइल का शासकीयकरण बंद होना चाहिए। विभाग पहले स्कूलों में सरकारी डिवाइस उपलब्ध कराए, उसके बाद कोई फरमान जारी करे। नए सत्र की शुरुआत में शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने के बजाय, ऑनलाइन अटेंडेंस का यह तुगलकी फरमान थोपकर उनकी ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है, जिसे छत्तीसगढ़ का शिक्षक कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि जब विभाग का सर्वर खुद ‘आईसीयू’ में वेंटिलेटर पर है, तो उसकी तकनीकी विफलता का खामियाजा शिक्षक अपने वेतन की कटौती के रूप में क्यों भुगतें?
42 डिग्री की जानलेवा गर्मी और एसी में बैठे अफसर
फेडरेशन ने भीषण गर्मी को लेकर भी सरकार और अधिकारियों को घेरा। जिला अध्यक्ष ने कहा कि 42 डिग्री के इस जानलेवा तापमान में छोटे बच्चों और शिक्षकों का दर्द एसी (AC) कमरों में बैठे अफसरों को समझ नहीं आता। शिक्षकों को पढ़ाने के मूल कार्य से भटकाकर विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन कार्यों के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि मानवता के नाते विभाग को अपनी जिद छोड़नी होगी। जब तक ऐप की तकनीकी खामियां शत-प्रतिशत दूर नहीं होतीं, तब तक इसे तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा प्रदेश का हर एक शिक्षक सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। जरूरत पड़ने पर फेडरेशन ‘मोबाइल रख, मशाल उठा’ आंदोलन का आगाज करेगा और स्वयं के मोबाइल से विभाग का कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र कुमार राठौर ने रखीं ये प्रमुख मांगें:
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र कुमार राठौर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के सामने तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- मैनुअल अटेंडेंस को मिले वैधता: तकनीकी रूप से पूर्ण सुधार होने तक स्कूलों में पारंपरिक मैनुअल (रजिस्टर) अटेंडेंस को ही पूर्ण वैधता दी जाए।
- वेतन रोकने की धमकी हो वापस: तकनीकी त्रुटियों या नेटवर्क न होने के कारण किसी भी शिक्षक का वेतन रोकने या काटने का दमनकारी आदेश तत्काल निरस्त किया जाए।
- शाला संचालन के समय में बदलाव: 42 डिग्री के भीषण तापमान और उमस को देखते हुए नौनिहालों और शिक्षकों के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु शाला संचालन के समय में तत्काल आंशिक परिवर्तन किया जाए।
- संसाधनों की पूर्ति हो पहले: आला अफसर ऑनलाइन के चक्कर में पड़ने से पहले प्रदेश के एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति करें और स्कूलों में पर्याप्त बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराएं।
डिजिटल इंडिया का स्वागत, लेकिन शोषण बर्दाश्त नहीं
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे ‘डिजिटल इंडिया’ की अवधारणा का स्वागत करते हैं, लेकिन अव्यवस्था, तानाशाही और धमकियों के दम पर शिक्षकों का शोषण करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। यदि समय रहते मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली संपूर्ण स्थितियों की जवाबदारी शासन और शिक्षा विभाग की होगी।



