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बलौदा बाजार के सहकारी तंत्र में “अजब सोनाखान की गजब समितियां: बैंक में जमीन ‘बंधक’ है, पर समितियों में ‘मलाई’ का प्रबंधन चकाचक है!”

दिले राम सेन।सोनाखान।सहकारी समितियां, जिन्हें किसानों की रीढ़ माना जाता है, वर्तमान में भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी के आरोपों से घिरी हुई हैं। जिले के तहसील सोनाखान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) में एक ऐसे बड़े खेल का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दी हैं।

नियमों को ताक पर रखकर ‘अपनों’ को फायदा

मामला सोना खान तहसील इत्यादि समिति जैसे खैरा, बिलारी (ज), गोलझर, देवरी, रीकोकला और बार बया जैसी समितियों से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां नियमों का पालन महज कागजों तक सीमित है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिन किसानों की जमीन पहले से अन्य बैंकों में बंधक (Mortgaged) है, उन्हें भी इन समितियों द्वारा खाद, बीज और धान खरीदी का दोहरा लाभ दिया जा रहा है।

​नियम क्या कहता है?

सहकारिता विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि एक ही खसरा नंबर या भूमि पर दोहरी ऋण सुविधा या लाभ नहीं लिया जा सकता। यदि भूमि बंधक है, तो उस पर अन्य वित्तीय लाभ तब तक प्रतिबंधित रहते हैं जब तक एनओसी (NOC) प्राप्त न हो।

दोहरी मार: वित्तीय संतुलन और वसूली पर संकट

​इस गड़बड़ी का असर केवल वर्तमान लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर रहा है:

  • ​वसूली में पेच: जब एक ही जमीन पर दो जगह से लाभ लिया जाता है, तो ऋण वसूली (Recovery) के समय समितियों का बकाया काटना मुश्किल हो जाता है।
  • ​अपात्रों का बोलबाला: इस धांधली के कारण वास्तविक और पात्र किसान सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं, जबकि ‘पहुंच’ वाले लोग नियमों को दरकिनार कर लाभ उठा रहे हैं।
  • ​दस्तावेजी लापरवाही: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पंजीयन के समय ‘ऋण पुस्तिका’ और भूमि रिकॉर्ड की गहन जांच नहीं की जा रही। यह सीधे तौर पर समिति प्रबंधकों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

प्रशासन की भूमिका और उठते सवाल

​इतने बड़े स्तर पर हो रही अनियमितता ने प्रशासन की निगरानी प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या जमीनी स्तर के राजस्व और सहकारिता अधिकारी इस खेल से अनजान हैं, या फिर यह सब किसी बड़े ‘संरक्षण’ के साये में फल-फूल रहा है?

​अधिकारियों का पक्ष

​मामले की गंभीरता को देखते हुए नोडल अधिकारी जी.एन. साहू ने स्पष्ट किया है कि:

​“यदि समितियों में इस तरह की अनियमितता या बंधक भूमि पर लाभ देने के मामले सामने आते हैं, तो संबंधितों के विरुद्ध जांच कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

ग्रामीणों की हुंकार: “आर-पार की जांच हो”

​क्षेत्र के जागरूक किसानों और ग्रामीणों ने अब इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि:

  1. ​सभी संदिग्ध समितियों की रैंडम जांच (Random Audit) तत्काल शुरू हो।
  2. ​डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान कर बंधक भूमि वाले मामलों को चिन्हित किया जाए।
  3. दोषी अधिकारियों और समिति प्रबंधकों पर जांच की जाए।

यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सहकारी ढांचे में लगी दीमक है। यदि समय रहते इन ‘सफेदपोश’ गड़बड़ियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में सरकारी खजाने को बड़ी चपत लगनी तय है।

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