बलौदाबाजार-भाटापारा | 13 मार्च, 2026 जिला पंचायत बलौदाबाजार-भाटापारा के उस विवादास्पद तबादला आदेश की धज्जियां उड़ गई हैं, जिसे ‘प्रशासनिक हित’ का नाम देकर जारी किया गया था। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के कड़े रुख के बाद जिला पंचायत प्रशासन को अपने ही आदेश को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने पर मजबूर होना पड़ा है।

अहंकार बनाम कानून की लड़ाई
2 फरवरी 2026 को जिला पंचायत ने ग्राम पंचायत सेमरिया के सचिव सुरेश कुमार निषाद को अचानक कसडोल के आमाखोहा भेजने का फरमान सुनाया था। प्रशासन को शायद अंदाजा नहीं था कि उनका यह ‘रूटिन’ तबादला कोर्ट की दहलीज पर औंधे मुंह गिरेगा। सचिव ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद WPS क्रमांक 1850/2026 में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 23 फरवरी को ही इस पर ‘स्टे’ लगा दिया था।
बैकफुट पर प्रशासन, जारी करना पड़ा नया आदेश
कोर्ट के हंटर का असर ऐसा हुआ कि 12 मार्च को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नया आदेश जारी करना पड़ा। इसमें स्पष्ट लिखा है कि सुरेश कुमार निषाद का स्थानांतरण अगले आदेश तक स्थगित रहेगा और वे अपनी पुरानी जगह यानी सेमरिया में ही जमे रहेंगे।
चर्चाओं का बाजार गर्म: आखिर क्यों गिरी गाज?
इलाके में अब यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर सचिव के तबादले के पीछे ‘प्रशासनिक मजबूरी’ थी या ‘राजनीतिक दबाव’? कोर्ट में आदेश का न टिक पाना जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और विधिक समझ पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। फिलहाल, सचिव की जीत ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
अब देखना दिलचस्प होगा कि अगली सुनवाई में प्रशासन कोर्ट को क्या सफाई देता है। क्या यह तबादला पूरी तरह रद होगा या प्रशासन फिर से अपनी जिद दोहराएगा?



