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सेवा और समर्पण के एक अध्याय का समापन: अमलडीहा शाला के भृत्य धनीराम यादव को मिली भावभीनी विदाई

दिले राम सेन।अमलडीहा (चांपा) | विदाई की घड़ी हमेशा भावुक होती है, खासकर तब जब विदा होने वाला व्यक्ति संस्था की ‘रीढ़’ बनकर दशकों तक सेवा में रहा हो। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अमलडीहा में पदस्थ भृत्य श्री धनीराम यादव की सेवानिवृत्ति पर आयोजित गरिमामय विदाई समारोह में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए यादव भैया की विदाई पर पूरा विद्यालय परिवार और ग्रामवासी अपनी भावनाओं को रोक न सके।

सम्मान और आत्मीयता का संगम

​समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि संकुल समन्वयक श्री राजेश कंवर एवं संस्था प्रमुख प्रधान पाठक श्री फूलसिंह कंवर की उपस्थिति में हुई। विद्यालय परिवार ने श्री यादव का तिलक लगाकर और पुष्पमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उपस्थित अतिथियों ने उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की मंगलकामना की।

“विद्यालय की रीढ़ और बच्चों के मित्र”

​समारोह के दौरान वक्ताओं ने श्री धनीराम यादव के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए:

  • राजेश कंवर (संकुल समन्वयक): “यादव भैया केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि इस शाला की रीढ़ रहे हैं। उनके व्यवहार में जो अपनापन था, वह विरले ही मिलता है।”
  • फूलसिंह कंवर (प्रधान पाठक): “वे शिक्षकों और बच्चों के बीच एक मजबूत सेतु थे। उनकी मौजूदगी के कारण विद्यालय संचालन में हमें कभी कोई चिंता नहीं हुई।”
  • श्रीमती सविता खरे (प्रधान पाठक, प्रा. शा.): “धनीराम जी अकेले ही पूरी व्यवस्था संभाल लेते थे, उनकी कार्यकुशलता अद्वितीय है।”

​ग्राम सरपंच प्रतिनिधि भूपेन्द्र सिंह कंवर और शाला विकास समिति के भागीरथी मन्नेवाल ने भी उन्हें गाँव का एक अभिन्न अंग बताया जो सामाजिक कार्यों में भी सदैव अग्रणी रहे।

उपहारों के साथ दी गई विदाई

​विदाई की इस बेला में शिक्षकों और बच्चों ने श्री यादव को विभिन्न उपहार भेंट कर अपनी कृतज्ञता प्रकट की। इस अवसर पर श्री राजेश भट्ट, हेतराम देवांगन, लोकनाथ सेन, पंकज कमलाकर, श्रीमती दीपिका देवांगन, श्रीमती पुष्पा डहरिया एवं रसोईया कृष्णा डहरिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

घर तक छोड़ने गए शिक्षक और ग्रामीण

​समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब विदाई के बाद सामूहिक भोज हुआ और फिर समस्त शिक्षकगण व ग्रामीणजन श्री धनीराम यादव को ससम्मान उनके निवास ग्राम तक छोड़ने गए। विद्यालय से विदा होते समय बच्चों और शिक्षकों की आँखें नम थीं, जो उनके प्रति गहरे स्नेह और सम्मान का प्रतीक है।

“सेवा तो हर कोई करता है, लेकिन याद वही रखे जाते हैं जो कार्य को अपना धर्म और संस्था को अपना परिवार मान लेते हैं।”

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