सुरेश कुमार मिरी कसडोल छत्तीसगढ़ के कसडोल विकासखंड के अंतर्गत आने वाले आदर्श ग्राम कोट से महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सुरक्षा की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। गाँव की सुरक्षा, शांति और सामाजिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए यहाँ की महिलाओं ने एकजुट होकर एक ‘महिला कमांडो’ टीम का गठन किया है। अब इस गाँव की सुरक्षा और अनुशासन की कमान पूरी तरह से इन जाँबाज महिलाओं के हाथों में है।

शाम ढलते ही शुरू होती है ‘स्पेशल पेट्रोलिंग’
ग्राम कोट की ये महिला कमांडो अनुशासन और सतर्कता की मिसाल पेश कर रही हैं। हर रोज़ जैसे ही शाम ढलती है और गाँव की गलियों में सन्नाटा पसरने लगता है, ये महिलाएँ लाठी-डंडों और पूरी मुस्तैदी के साथ पेट्रोलिंग (भ्रमण) पर निकल पड़ती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य गाँव की गलियों में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखना और महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है।
नशाखोरी और अवैध शराब के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष विंग का गठन गाँव में पैर पसार रही अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए किया गया है।
- मुख्य निशाना: गाँव में गुपचुप तरीके से होने वाली कच्ची शराब का निर्माण और उसकी अवैध बिक्री।
- महिलाओं का संकल्प: स्थानीय महिलाओं का साफ़ कहना है कि घर और समाज को बर्बाद करने वाले नशे के खिलाफ यह जंग अब रुकने वाली नहीं है। गाँव में पूर्ण शांति और नशामुक्त वातावरण तैयार करना ही इस टीम का अंतिम लक्ष्य है।
असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त, ग्रामीणों ने की सराहना
”जब से गाँव की बहन-बेटियाँ और माताएँ ‘कमांडो’ बनकर सड़कों पर उतरी हैं, तब से हुड़दंग करने वाले और असामाजिक तत्वों के हौसले पूरी तरह पस्त हो चुके हैं। अब गाँव में एक अलग ही सुरक्षा का अहसास होता है।”
— ग्राम कोट के स्थानीय बुजुर्ग एवं युवा
महिला कमांडो की इस अभूतपूर्व सक्रियता से गाँव का माहौल तेजी से बदल रहा है। चोरी-छिपे नशा करने वाले और गलियों में बिना वजह घूमने वाले लोग अब इस टीम के खौफ से गायब रहने लगे हैं।
आसपास के इलाकों के लिए बनीं ‘रोल मॉडल’
ग्राम कोट की इस अनूठी और साहसिक पहल की गूँज अब आसपास के अन्य गाँवों में भी सुनाई दे रही है। इस कदम को न केवल कानून-व्यवस्था सुधारने वाले एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह इस बात का भी जीता-जागता सबूत है कि जब ग्रामीण महिलाएँ ठान लें, तो वे समाज की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं।



