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खबर: अब बच्चे बचाएंगे जंगल! अर्जुनी में ‘वनाग्नि’ के खिलाफ गूंजा जन-आंदोलन का शंखनाद

महेश्वर जायसवाल। बलौदाबाजार | 11 फरवरी जंगलों को धधकती आग से बचाने के लिए अब अर्जुनी वन परिक्षेत्र ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि गाँव के बच्चे और वन प्रबंधन समितियाँ “फायर फाइटर्स” की भूमिका में नज़र आएंगे। बुधवार को अर्जुनी में आयोजित एक विशाल कार्यशाला में ‘शून्य वनाग्नि’ (Zero Forest Fire) का संकल्प लिया गया।

 जब नौनिहालों ने मंच से दी चेतावनी

​इस कार्यशाला की सबसे खास बात रही गिरौदपुरी विद्यालय के छात्रों की भागीदारी। बच्चों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए भावुक कर देने वाली प्रस्तुति दी। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही पूरे जंगल के इकोसिस्टम को तबाह कर देती है। कविता और चित्रों के माध्यम से छात्रों ने बड़ों को याद दिलाया कि— “जंगल बचेगा, तभी हमारा कल बचेगा।”

 ये हैं वनों के असली ‘रक्षक’

​कार्यक्रम में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने पिछले 5 वर्षों के रिकॉर्ड के आधार पर उन गाँवों की पीठ थपथपाई जहाँ वनाग्नि पर सबसे बेहतर नियंत्रण पाया गया। उत्कृष्ट कार्य के लिए निम्नलिखित समितियों को सम्मानित किया गया:

  1. अर्जुनी 2. थरगाँव
  2. महराजी 4. खोसड़ा

अधिकारियों का मंत्र: “सूचना ही सुरक्षा है”

​कार्यशाला में प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक गुलशन कुमार साहू और उनकी टीम ने ग्रामीणों को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। अधिकारियों ने साफ कहा कि आग लगने के पहले 10 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि ग्रामीण तत्काल सूचना वन विभाग को दें, तो बड़े नुकसान को टाला जा सकता है।

कार्यशाला के मुख्य स्तंभ:

  • रणनीति: अग्नि सीजन 2026 के लिए ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ पर जोर।
  • सम्मान: सक्रिय जनभागीदारी के लिए सरपंचों और समितियों को नकद पुरस्कार/प्रशस्ति पत्र।
  • उपस्थिति: डब्बू साहू, मीनाक्षी साहू, रूपेश्वरी दीवान सहित सैकड़ों ग्रामीण और छात्र।

“जंगल की आग, पर्यावरण का विनाश; जन-जन की सतर्कता, जीवन का विकास।”

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