महेश्वर जायसवाल।कोटियाडीह कसडोल विकासखंड में शासकीय शिक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। प्राथमिक शाला चकरबाय का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि ग्राम पंचायत कोटियाडीह से प्रधानपाठक की मनमानी का एक नया मामला उजागर हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्षेत्र में नौनिहालों के भविष्य के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बंद मिला प्रधानपाठक का कक्ष
ग्राम कोटियाडीह के प्राथमिक शाला में उस वक्त हंगामा मच गया जब करीब 50 से 60 की संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर स्कूल परिसर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के प्रधानपाठक रामाधार पुरेना लंबे समय से अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। जब ग्रामीण पहुंचे, तब प्रधानपाठक शाला से गायब मिले।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रधानपाठक सुबह निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचकर केवल ऑनलाइन हाजिरी (चेक-इन) दर्ज कराते हैं और तुरंत वहां से नदारद हो जाते हैं। इसके बाद वे दिनभर गायब रहते हैं और शाम को केवल छुट्टी के वक्त ऑनलाइन चेक-आउट करने ही वापस आते हैं।
शराब के नशे में ड्यूटी करने का आरोप, बच्चों ने भी की पुष्टि
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि प्रधानपाठक का शराब पीकर स्कूल आना कोई नई बात नहीं है। यह उनकी दिनचर्या बन चुकी है। वे यदि कभी स्कूल में रुकते भी हैं, तो अत्यधिक नशे की हालत में रहते हैं।
स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने भी निर्भीक होकर ग्रामीणों और प्रतिनिधियों के सामने प्रधानपाठक की इस मनमानी की पुष्टि की। बच्चों ने बताया कि गुरुजी के इस रवैये के कारण उनकी पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है।
बीईओ ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब कसडोल के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) अरविंद ध्रुव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया:
”ग्रामीणों के माध्यम से आज ही इस मामले की जानकारी प्राप्त हुई है। मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में ग्रामीणों और बच्चों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित प्रधानपाठक के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
कार्रवाई पर टिकीं नजरें
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से क्षेत्र के पालकों में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी तत्परता से जांच पूरी करता है और आरोपी शिक्षक पर क्या कार्रवाई होती है, ताकि बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था में कोई ठोस सुधार आ सके।



