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छत्तीसगढ़ उपचुनाव: कसडोल के ग्राम ‘कोट’ में टूटा चुनाव बहिष्कार का सिलसिला, चुनावी रंग में रंगा गांव, प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत

सुरेश कुमार मिरी। कसडोल छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव को लेकर सियासी पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाने के बाद अब चुनावी रणभेरी बज चुकी है। इस पूरे उपचुनाव में बलौदाबाजार जिले के कसडोल जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत ‘कोट’ (क) सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। वजह है— यहाँ के ग्रामीणों का बदला हुआ रुख। जिस गांव ने कभी चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया था, आज वहां लोकतंत्र का उत्सव अपने पूरे शबाब पर है।

​️ कभी किया था पूर्ण बहिष्कार, अब चुनावी रंग में रंगा गांव

ग्राम पंचायत कोट(क) पिछले कुछ समय से स्थानीय राजनीति का केंद्र बना हुआ है। बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने अपनी स्थानीय समस्याओं और मांगों को लेकर चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर दिया था। उस वक्त ग्रामीणों की नाराजगी के आगे राजनीतिक दल और प्रत्याशी बेबस नजर आए थे।

​लेकिन इस उपचुनाव में तस्वीर 180 डिग्री बदल चुकी है। बहिष्कार की राह छोड़ ग्रामीणों ने इस बार लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा भरोसा जताया है। ग्रामीण न केवल चुनाव का स्वागत कर रहे हैं, बल्कि चुनावी गतिविधियों में खुलकर हिस्सा भी ले रहे हैं।

​‍♂️ सोमवार से थमा नहीं प्रचार का पहिया, घर-घर दस्तक दे रहे प्रत्याशी

​जब से प्रत्याशियों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित हुए हैं, तब से गांव की गलियां चुनावी नारों से गूंज रही हैं।

  • ​धुआंधार जनसंपर्क: प्रत्याशी और उनके समर्थक सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक घर-घर जाकर मतदाताओं से आशीर्वाद ले रहे हैं।
  • ​ग्रामीणों का उत्साह: बहिष्कार का फैसला पीछे छोड़ चुके ग्रामीण अब प्रत्याशियों की बातें सुन रहे हैं, उनके वादों को तौल रहे हैं और गांव के विकास के मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं।
  • ​प्रत्याशियों के बड़े दावे: चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवार भी ग्रामीणों को रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वे कोट ग्राम पंचायत की पुरानी और लंबित समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करने का वादा कर रहे हैं।

​ अब पूरे कसडोल क्षेत्र की नजरें इस बात पर टिकी हैं:

  1. ​ग्रामीणों का यह बदला हुआ रुख और उत्साह किस प्रत्याशी की किस्मत चमकाएगा?
  2. ​क्या बहिष्कार का इतिहास बदलने वाला यह गांव इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज कराएगा?
  3. ​इस दिलचस्प और त्रिकोणीय मुकाबले में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा?

संवाददाता की रिपोर्ट

कोट गांव में फिलहाल चुनावी उत्साह अपने चरम पर है। यह तो आने वाला वक्त और मतगणना के नतीजे ही तय करेंगे कि जनता जनार्दन किसे अपनी पंचायत की कमान सौंपती है, लेकिन इस गांव ने बहिष्कार का रास्ता छोड़ चुनाव में शामिल होकर लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर जरूर पेश कर दी है।

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